लखनऊ (एसएनबी)। टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को लेकर उठे विवाद पटाक्षेप होने के बाद राज्य सरकार ने शिक्षकों के चयन की दिशा में कदम बढ़ा दिये हैं। टीईटी परीक्षा पास करने वाले छात्रों में से लगभग 73 हजार शिक्षकों का काउंसलिंग के जरिये चयन होगा। शिक्षकों की चयन प्रक्रिया आगामी अक्टूबर और नवम्बर माह के बीच कराने की तैयारी है।
शिक्षकों का चयन करने से पहले सरकार नयी नियमावली को अंतिम रूप देगी। बीते वर्ष नवम्बर माह में राज्य सराकर ने शिक्षकों के चयन के लिए टीईटी परीक्षा करायी थी। जिसमें दो लाख से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की थी। परीक्षा के बाद शिक्षकों के चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। जिसका अभी पिछले महीने पटाक्षेप हुआ है। विशेष सचिव बेसिक शिक्षा हरेन्द्रवीर सिंह ने बताया कि परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों छात्रों से शिक्षकों का चयन करने की दिशा में शासनस्तर पर कवायद चल रही है। इसके लिए नयी नियमावली पर काम चल रहा है। नियमावली के बनने के बाद प्रदेश के सभी जनपदों में शिक्षकों के पदों की सूची तैयार होगी और फिर टीईटी परीक्षा पास करने वालों से आवेदन मांगे जाएंगे। आवेदकों के बीच काउंसलिंग करके शिक्षकों का चयन किया जाएगा। शिक्षकों की चयन प्रक्रिया को आगामी अक्टूबर और नवम्बर माह के बीच कराने की तैयारी है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि नियमावली में हाईस्कूल, इन्टरमीडिएट, बीएड तथा टीईटी परीक्षा के अंकों को आधार पर मेरिट तैयार करने की व्यवस्था को लाया जा रहा है। मेरिट में आने वाले छात्रों में काउंसलिंग के द्वारा शिक्षकों का चयन होगा। टीईटी मामले की सुनवाई 27 को इलाहाबाद (एसएनबी)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने टीईटी मामले को लेकर दाखिल याचिकाओं की अगली सुनवाई की तिथि 27 अगस्त नियत की है। न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में यह बताने पर कि सरकार नियमों में बदलाव करने जा रही है। इस पर न्यायालय ने सरकार को अवसर देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण टण्डन ने यादव कपिल देव सहित सैकड़ों लोगों की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 72 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के तहत टीईटी परीक्षा हुई, जिसमें सफल अभ्यर्थियों को बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों की तरफ से नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया था। इसकी वैधता को चुनौती दी गयी है। याची का कहना है कि नियमानुसार बोर्ड को ऐसा विज्ञापन जारी करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसा अधिकार बीएसए को ही है। अन्य याचिकाएं भी विभिन्न मांगों को लेकर दाखिल की गयी हैं। न्यायालय ने विज्ञापन पर रोक लगा रखी है। काउंसलिंग से तैयार होगी शिक्षकों की सूची
शिक्षकों का चयन करने से पहले सरकार नयी नियमावली को अंतिम रूप देगी। बीते वर्ष नवम्बर माह में राज्य सराकर ने शिक्षकों के चयन के लिए टीईटी परीक्षा करायी थी। जिसमें दो लाख से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की थी। परीक्षा के बाद शिक्षकों के चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। जिसका अभी पिछले महीने पटाक्षेप हुआ है। विशेष सचिव बेसिक शिक्षा हरेन्द्रवीर सिंह ने बताया कि परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों छात्रों से शिक्षकों का चयन करने की दिशा में शासनस्तर पर कवायद चल रही है। इसके लिए नयी नियमावली पर काम चल रहा है। नियमावली के बनने के बाद प्रदेश के सभी जनपदों में शिक्षकों के पदों की सूची तैयार होगी और फिर टीईटी परीक्षा पास करने वालों से आवेदन मांगे जाएंगे। आवेदकों के बीच काउंसलिंग करके शिक्षकों का चयन किया जाएगा। शिक्षकों की चयन प्रक्रिया को आगामी अक्टूबर और नवम्बर माह के बीच कराने की तैयारी है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि नियमावली में हाईस्कूल, इन्टरमीडिएट, बीएड तथा टीईटी परीक्षा के अंकों को आधार पर मेरिट तैयार करने की व्यवस्था को लाया जा रहा है। मेरिट में आने वाले छात्रों में काउंसलिंग के द्वारा शिक्षकों का चयन होगा। टीईटी मामले की सुनवाई 27 को इलाहाबाद (एसएनबी)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने टीईटी मामले को लेकर दाखिल याचिकाओं की अगली सुनवाई की तिथि 27 अगस्त नियत की है। न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में यह बताने पर कि सरकार नियमों में बदलाव करने जा रही है। इस पर न्यायालय ने सरकार को अवसर देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण टण्डन ने यादव कपिल देव सहित सैकड़ों लोगों की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 72 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के तहत टीईटी परीक्षा हुई, जिसमें सफल अभ्यर्थियों को बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों की तरफ से नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया था। इसकी वैधता को चुनौती दी गयी है। याची का कहना है कि नियमानुसार बोर्ड को ऐसा विज्ञापन जारी करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसा अधिकार बीएसए को ही है। अन्य याचिकाएं भी विभिन्न मांगों को लेकर दाखिल की गयी हैं। न्यायालय ने विज्ञापन पर रोक लगा रखी है। काउंसलिंग से तैयार होगी शिक्षकों की सूची
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