सहायक अध्यापकों की भर्ती मामले में सुनवाई जारी
विज्ञान-गणित शिक्षकों के आधे पद सीधी भर्ती से
राजीव दीक्षित, लखनऊ बेसिक शिक्षा परिषद के जूनियर हाईस्कूलों में विज्ञान और गणित विषयों के शिक्षकों के 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरे जाएंगे। शेष 50 फीसदी पद प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों की प्रोन्नति से भरे जाएंगे। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने उप्र बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981 की धारा-पांच में संशोधन करने का प्रस्ताव है। बेसिक शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिलने की संभावना है। प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित 1.14 लाख प्राथमिक विद्यालय और तकरीबन 46,000 जूनियर हाईस्कूल हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की जहां सीधी भर्ती होती हैं, वहीं जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों के सभी पद प्रोन्नति से भरे जाते हैं। प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुए शिक्षकों को तीन साल की सेवा पूरी करने पर प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक या जूनियर हाईस्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर प्रोन्नत किया जाता है। प
दों की उपलब्धता के आधार पर बेसिक शिक्षा परिषद इस समयसीमा को शिथिल भी कर सकती है। जूनियर हाईस्कूलों में विज्ञान और गणित विषयों के शिक्षकों की जबरदस्त कमी है। वहीं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने कक्षा छह से आठ में शिक्षकों की तैनाती के लिए अलग से टीईटी अनिवार्य कर दी है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने बीती 30 नवंबर को जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भी टीईटी आयोजित की थी जिसमें 2,64,928 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं। चूंकि वर्तमान नियम के तहत जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों के सभी पद प्रोन्नति से भरने की व्यवस्था है, इसलिए टीईटी उत्तीर्ण कर चुके इन अभ्यर्थियों को फिलहाल उच्च प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त नहीं किया जा सकता है। इस गतिरोध को दूर करने के लिए नियमावली में बदलाव करने का प्रस्ताव है ताकि जूनियर हाईस्कूलों में विज्ञान और गणित विषयों के 50 फीसद पद सीधी भर्ती से भरे जा सकें।
सहायक अध्यापकों की भर्ती मामले में सुनवाई जारी
• अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के सहायक अध्यापक पद पर चयन एवं नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई जारी रहेगी। सोमवार को इस मामले पर याचियों की ओर से बहस की गई। यादव कपिलदेव सहित अन्य दर्जनों अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन सुनवाई कर रहे हैं। सुनवाई के लिए अगली तिथि 3 सितंबर नियत की गई है।
याचियोें की ओर से कहा गया कि बीटीसी अभ्यर्थी पहले ही प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, इसलिए अब इनको अलग से प्रशिक्षण देने की आवश्यकता नहीं है। यह भी कहा गया कि बीटीसी अलग श्रेणी है इसलिए उसका चयन पहले किया जाना चाहिए। इनके चयन के बाद शेष सीटों पर अन्य डिग्री धारक अभ्यर्थियों का चयन होना चाहिए। याचियों का कहना था कि सरकार पूर्व में विज्ञापित पदों को पूरी तरह से निरस्त करके नया विज्ञापन जारी करने जा रही है। याचिका पर प्रदेश सरकार का पक्ष अगली तिथि पर सुना जाएगा। सरकार को बीटीसी के अलग अभ्यर्थियों के चयन और नियुक्ति का आधार अभी तय करना है।
•अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। मोअल्लिम-ए-उर्दू और डिप्लोमा इन उर्दू टीचिंग करने वालों को प्राइमरी स्कूलों में सीधे उर्दू सहायक अध्यापक के रूप में तैनाती होगी। इसके लिए राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। प्राइमरी स्कूलों में मौजूदा समय 3480 उर्दू सहायक अध्यापकों के पद रिक्त हैं। सीधी भर्ती के लिए शीघ्र ही राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से अनुमति लेने के लिए पत्र भेजा जाएगा। यूपी में इसके पहले भी यह कोर्स करने वालों को सपा सरकार में ही उर्दू अध्यापक के पद पर रखा जा चुका है। एक बार फिर सपा सरकार में ही उर्दू शिक्षकों की भर्ती की तैयारी है।
प्रदेश में वर्ष 1994-95 में बेसिक शिक्षा परिषद के प्राइमरी स्कूलों में मोअल्लिम-ए-उर्दू और डिप्लोमा इन उर्दू टीचिंग करने वालों को शिक्षक बनाया गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इस उपाधि को शिक्षक बनाने के लिए अमान्य कर दिया। इस कोर्स को करने वालों ने हाईकोर्ट से राहत प्राप्त कर की तो सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 29 जून 2011 को इस कोर्स को करने वालों को पुन: उर्दू शिक्षक बनने के लिए पात्र मान लिया। इसके आधार पर ही इन डिग्रीधारकों को टीईटी में बैठने की अनुमति दी गई। पर अधिकतर टीईटी में बैठे ही नहीं। प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद मोअल्लिम-ए-उर्दू और डिप्लोमा इन उर्दू टीचिंग करने वालों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी।
according to dainik jagran..
लखनऊ : राज्य मंत्रिपरिषद की मंगलवार को होने वाली बैठक में बेसिक शिक्षा परिषद के संचालित प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अर्हताकारी परीक्षा का दर्जा दिए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। टीईटी के साथ केंद्र सरकार की केंद्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) को भी शिक्षकों की भर्ती के लिए अर्हताकारी परीक्षा का दर्जा दिया जाना संभव है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में परिषदीय शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादले की पुरानी व्यवस्था को बहाल करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल सकती है।
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