शिव प्रसाद कुशवाहा बनाम राज्य सरकार के आर्डर का हिंदी अनुवाद
रिट संख्या 29/2012
माननीय अरुण टंडन,न्यायमूर्ति
याची के विद्वान् अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि RTE एक्ट 2009 ( यहाँ से एक्ट के रूप में संदर्भित किया जाये) के अलोक में यह सरकार के लिए वैधानिक बन गया है कि सरकार सभी संस्थानों में आवश्यक योग्यता प्राप्त शिक्षको की नियुक्ति सुनिश्चित करे ,जो कि राज्य सरकार के नियंत्रण में हैं या इस (नियंत्रण) के उद्देश्य हेतु बेसिक शिक्षा परिषद् के नियंतार्ण में हैं.अतः उन्होंने ने तर्क दिया राज्य सरकार को वर्षो तक प्रक्रिया को रोक कर रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.राज्य की और से विद्वान् अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री सी,बी. यादव ने यद्यपि विवाद को अवास्तिथि दी और तर्क प्रस्तुत किया सीधी भर्तियों का सहारा 2004,2007 और 2008 में लिया जा चूका है.यह हो सकता है,इसमें कोई विवाद नहीं है कि आज के दिनांक में परिषदीय विद्यालयों में योग्यता प्राप्त की भारी कमी है .यह स्वाभाविक है कि पठन पाठन बाधित होगा.यह व्यावहारिक रूप से एक्ट 2009 के प्रावधानों को विफल करता है.यह न्यायलय महसूस करती है कि बिना किसी अतिरिक्त देरी के परिषदीय विद्यालयों में योग्य शिक्षको की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकालने के लिए राज्य सरकार पर जोर डालना न्यायसंगत और उचित होगा.
श्री सी.बी.यादव ,विद्वान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने राज्य की ओर से न्यायलय को भरोसा दिलाया है इस प्रकार का विज्ञापन 15 दिन के अन्दर प्रकाशित होगा और नियुक्ति की प्रक्रिया बिना किसी देरी के लागू नियमो के आलोक में प्रारंभ की जाएगी.
मामले को 27 सितम्बर 2012 को जुड़े हुए अन्य मामलो के साथ पुनः प्रस्तुत किया जाये.
माननीय अरुण टंडन ,न्यायमूर्ति
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